इंसान से लेकर हर जानदार को अपने जनसँख्या को बढ़ाने के लिए नर मादा की ज़रुरत होती है। इंसान एक समाज में रहते हैं जहाँ अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए और अपनी शारीरिक इच्छा को पूरा करने के लिए शादी की बेवस्था की गए है। वहीँ जब एक दूसरे से शादी करके जिंदगी को आगे बढ़ाने की बेवस्था है वहीं कोई ज़रूरी नहीं है के दो परिवार से आये हुवे लड़का लड़की में मेल नहीं भी रह सकता है तो दोनों अलग होने का फैसला करलेते हैं उसे ही तलाक़ कहते हैं।
इस्लाम में तलाक़ को बहुत ही ख़राब कार्य बताया गया है। कहाँ जाता है अगर किसी का तलाक़ होता है तो आसमान रो परता है लेकिन इस्लाम ने जो तरीका बताया तलाक़ का अगर उस तरीके से तलाक़ दे तो तलाक़ बहुत कम होगा। जैसे एक कंपनी चलाने अगर दो पार्टनर है और एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी चल रही है और अगर कुछ साल बाद दोनों पार्टनर में कुछ बातें नहीं मिली दोनों में समझदारी नहीं बन रही है तो बेहतर है दोनों कॉन्ट्रैक्ट ख़तम कर क अलग हो जाये वैसे ही शादी इस्लाम सामाजिक कॉन्ट्रैक्ट है लेकिन अगर बहुत कोसिस करने के बाद भी अगर दोनों में नहीं बन पाती है तो आखरी चीज़ है तलाक। इस्लाम में सब से बुरा हलाल चीज़ है तलाक़।
तलाक़ का इस्लामिक तरीक़ा
अगर शादी शुदा जोड़ा में नहीं बनता है तो दोनों तरफ के लोग साथ में बैठे और मसले का हल निकाले अगर हल न निकले फिर तलाक़ के बारे में सोंचे क्यों के फिर तलाक़ होना भी जरुरी हो जाता है। अलग होजाना ही बेहतर होता है नहीं तो दोनों की ज़िन्दगी बदतर हो जाती है।
तलाक़ देनेका तरीका
वैसे तो ३ तरीके से तलाक़ दिया जाता है और आम तौर पर चलन भी है।
१) एक ही बार में ३ बार तलाक़ बोल देना और सब ख़तम।
२) एक ही बार में ३ तलाक दे दे और ३ महीने रुके।
३) ३ महीने में हर महीने १ -१ तलाक़ दे।
तलाक़ का सही तरीक़ा।
अगर पति पत्नी में झगड़ा हो तलाक़ का नौबत आये तो पहले दोनों अपने होशोहवास में सोचे और मसला हल करने का कोसिस करे अगर दो नो से मसला हल न हो तो दोनों तरफ से १-१ आदमी जो जानकर हो अगुवा हो समझदार हो उसे लाये और उन्दोनो को सारा मामला बताये टेक वो दोनों मसले को हल करने का कोसिस करे अगर फिर भी बात नहीं बनी मसला हल नहीं हुवा फिर तलाक़ का सोंचे। अब तलाक़ कैसे हो तो क़ुरआन का बताया हुवा तरीका है लड़की को बस १ बार भी तलाक़ बोलदे और ३ महीना तक वो लड़की उसी घर में रहेगी वो हर चीज़ करेगी जैसे अपने घर में शादी शुदा लड़की रहती हो बस पति पत्नी एक साथ नहीं सोयेगी। अगर ३ महीने क अंदर पति चाहे वापस करलेना तो वापस कर सकती है और फिर साथ में रह सकती है बस पति खड़े मई तलाक़ नहीं देना चाहता तुम्हे वापस लेना चाहता हु। अगर उस ३ महीने के इद्दत में पति पत्नी के बिच सम्भोग हुवा तो भी तलाक़ नहीं होगा।
किस हालत में तलाक़ नहीं हो सकता ?
१) पति गुस्से के हालत में तलाक़ नहीं दे सकता है।
२) शराब पि कर या मानसिक बीमारी के हालत में या फिर नींद में तलाक़ नहीं होता है।
३) पत्नी अगर महिनाबारी के हालत में तलाक़ नहीं दिया जा सकता है।
४) पत्नी के पेट में अगर बच्चा है तो तलाक़ नहीं दिया जा सकता है।
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