हिंदुस्तान में जिसतरह से कोर्ट के आदेश और फैसले आरहे हैं उससे लगता है चाहे कुछ भी हो जाये लेकिन फैसला बीजेपी सरकार या हिदुत्वा के हक़ में ही आएगा। कहीं न कहीं लगता है कोर्ट भी मोदी सरकार से पूछ कर फैसले ले रही ह।
बाबरी मस्जिद का फैसला
इसी बीजेपी सरकार में हिंदुस्तान का ऐतिहासिक फैसला आया जिसमे कोर्ट ने ये माना की मस्जिद को शहीद करना गैरकानूनी और गलत था लेकिन फिर भी वहां मंदिर बनाने का इजाज़त दिया। इस फैसले को सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान के वही जज समझ सकते हैं जो फैसले देने के बाद रिटायर हुए और बीजेपी से राज्य सभा गए। बाकि दुन्या के जजों के सामने फैसला गलत ही रहा।
हिजाब विवाद का फैसला
जब कर्नाटक में हिजाब विवाद सुरु हुवा तो कोर्ट ने पहला गलती किया के फैसला आने तक हिजाब की अनुमति नहीं दिया। अब आज फैसला आया के हिजाब इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा है ही नहीं , वाह ! रे हिन्दुत्वा कोर्ट क्या फैसला दिया है। इस्लाम के बारे में फैसला दे रहे हो लेकिन इस्लामिक स्कॉलर से शायद जानने की कोसिस ही नहीं कर रहे हो क्यों के अगर किसी इस्लामिक स्कॉलर से पूछते तो नहीं लगता है कोई भी इस्लामिक स्कॉलर हिजाब को इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा नहीं मानता। पूछे भी कैसे अब तो कोर्ट को भी लग रहा है हर विषय के स्कॉलर तो मोदीजी ही है।
माइनॉरिटी का कोर्ट के द्वारा हक़ छीनने का कोसिस
हिंदुस्तानी सरकार के साथ साथ कोर्ट भी मुसलमानो को पीछे धकेलने में लगी है। ऐसे फैसले से मुसलमानो का मनोबल टूटेगा और शायद हज़ारो लाखो मुस्लिम लड़कियां शिक्षा से वंचित होगी। हम कहते हैं अगर एक लड़की पढ़ती है तो एक जनरेशन पढता है और इस फैसले से पुरे जनरेशन शिक्षा से वंचित किया है।
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