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Who was Sinead O'Connor

  Sinead O'Connor: The Enigmatic Voice of a Generation Sinead O'Connor, a name that resonates with soul-stirring vocals and fearless individuality, is one of the most iconic and influential figures in the history of music. Born on December 8, 1966, in Glenageary, County Dublin, Ireland, Sinead Marie Bernadette O'Connor rose to fame in the late 1980s and early 1990s, captivating the world with her hauntingly beautiful voice and unwavering commitment to self-expression. Early Life and Musical Beginnings Raised in a turbulent household, Sinead O'Connor found solace in music from an early age. She developed a passion for singing and songwriting, which would become her lifeline and conduit for expressing her deepest emotions and thoughts. Struggling with a troubled relationship with her parents, she sought refuge in music, eventually dropping out of school to pursue her musical dreams. At the tender age of 15, O'Connor joined a band called In Tua Nua, which exposed her t...
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Who was Tony Bennett?

  Tony Bennett: A Timeless Icon of Music When it comes to musical legends, few names shine as brightly as Tony Bennett. Born Anthony Dominick Benedetto on August 3, 1926, in Queens, New York, this remarkable artist has left an indelible mark on the world of music. With a career spanning over seven decades, Tony Bennett's velvety voice, impeccable phrasing, and genuine passion for his craft have earned him the admiration and respect of generations of music lovers. A Humble Beginning: Tony Bennett's journey to stardom began in humble surroundings. Growing up in an Italian-American family, he faced the struggles of the Great Depression, which significantly impacted his early years. However, even during those challenging times, young Tony found solace in music. His first performance came at the tender age of 10 when he sang at the opening of the Triborough Bridge. The Breakthrough: Bennett's first big break came in 1949 when he was discovered by Bob Hope, who saw potential in t...

हिंदुस्तान में कोर्ट पर हिन्दुत्वा हावी।

 हिंदुस्तान में जिसतरह से कोर्ट के आदेश और फैसले आरहे हैं उससे लगता है चाहे कुछ भी हो जाये लेकिन फैसला बीजेपी सरकार या हिदुत्वा के हक़ में ही आएगा। कहीं न कहीं लगता है कोर्ट भी मोदी सरकार से पूछ कर फैसले ले रही ह।  बाबरी मस्जिद का फैसला  इसी बीजेपी सरकार में हिंदुस्तान का ऐतिहासिक फैसला आया जिसमे कोर्ट ने ये माना की मस्जिद को शहीद करना गैरकानूनी और गलत था लेकिन फिर भी वहां मंदिर बनाने का इजाज़त दिया।  इस फैसले को सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान के वही जज समझ सकते हैं जो फैसले देने के बाद रिटायर हुए और बीजेपी से राज्य सभा गए। बाकि दुन्या के जजों के सामने फैसला गलत ही रहा।  हिजाब विवाद का फैसला  जब कर्नाटक में हिजाब विवाद सुरु हुवा तो कोर्ट ने पहला गलती किया के फैसला आने तक हिजाब की अनुमति नहीं दिया।  अब आज फैसला आया के हिजाब इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा है ही नहीं , वाह ! रे हिन्दुत्वा कोर्ट क्या फैसला दिया है।  इस्लाम के बारे में फैसला दे रहे हो लेकिन इस्लामिक स्कॉलर से शायद जानने की कोसिस ही नहीं कर रहे हो क्यों के अगर किसी इस्लामिक स्कॉलर से पूछते तो नहीं लगत...

जिहाद एक जिनका तरीका।

 जिहाद : आम तौर पर आजकल जिहाद का नाम सुनते ही लोग या तो डर जाते हैं या फिर घिरना के नज़र्या से देखने लगते हैं। हिंदुस्तान में तो जिहाद को इतना बदनाम कर दिया की न जाने क्या क्या नाम रख दिया जैसे लव जिहाद , ज़मीन जिहाद।   जिहाद का असली मतलब है सच के लिए झूठ से लड़ाई , अच्छाई के लिए बुराई से लड़ाई , न्याय के लिए अन्याय से लड़ाई , फिर इसे क्यों बदनाम किया गया।  ये खास कर तब बदनाम हुवा जब कुछ मुस्लिम किसी वजह से हथियार उठाया और जिहाद का नाम देकर लोगों को मारा।  ये तो वही बात हो गई जैसे कुछ हिन्दू लोग जयश्री राम बोल कर किसी को मारता है , किसी को धमकाता है , कहीं लड़की को छेरता है , कहीं उपद्रव मचाता है तो क्या हम जयश्री राम को आतंकी नारा कहेंगे क्या ? हर किसी को जेहादी बनना चाहिए अगर ये कहूं तो कुछ गलत नहीं होगा।  

हलाला या हरामा

हलाला : इस्लामिक तरीके से हलाला उसे कहा जाता है जैसे अगर किसी पति पत्नी में तलाक हो गया और दोनों अलग हो गए लड़की कहीं और अपने मर्ज़ी से शादी कर्ली और अपने पति के साथ खुसी खुसी रहने लगी अब किसी कारन बस उस पति से भी तलाक होजाता है फिर अगर चाहे तो पहले वाले पति से शादी करना चाहे या पहले वाला पति शादी करना चाहे तो कर सकती है उसे असल हलाला कहा जाता है।  हिंदुस्तान में जो होता है उसे हलाला या हारमा कहते हैं  हमारे यहाँ जो आजकल चलरहा है जहाँ तलाक दे दिया फिर खुद से शादी करने के लिए अपनी बीवी को दूसरे मर्द को भाड़े पर लेकर शादी कर दिया और उसे फिर बोला जाता है तलाक देने टेक वो फिर से शादी करे इसे हलाला नहीं बल्कि हरामा कह सकते हैं।   इस्लामी तरीके से अगर तलाक दे तो हलाला की नौबत ही नहीं आएगी जैसे अगर किसी को तलाक देने का नौबत आजाये तो बस एक बार तलाक बोल कर छोर दे ३ महीना उसी घर में लड़की रहे फिर उसका तलाक हो जायेगा और फिर लड़की का जो हक़ है उसके साथ उनके माँ बाप के घर जाने दें। अब अगर वक़्त गुजरने क बाद अगर लड़के को पछतावा होता है और एहसास होता है के वही बीवी ठीक है तो फिर वो लड़की क...

तलाक़ क्यों ज़रूरी है।

 इंसान से लेकर हर जानदार को अपने जनसँख्या को बढ़ाने के लिए नर मादा की ज़रुरत होती है। इंसान एक समाज में रहते हैं जहाँ अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए और अपनी शारीरिक इच्छा को पूरा करने के लिए शादी की बेवस्था की गए है।  वहीँ जब एक दूसरे से शादी करके जिंदगी को आगे बढ़ाने की बेवस्था है वहीं कोई ज़रूरी नहीं है के दो परिवार से आये हुवे लड़का लड़की में मेल नहीं भी रह सकता है तो दोनों अलग होने का फैसला करलेते हैं उसे ही तलाक़ कहते हैं।  इस्लाम में तलाक़ को बहुत ही ख़राब कार्य बताया गया है।  कहाँ जाता है अगर किसी का तलाक़ होता है तो आसमान रो परता है लेकिन इस्लाम ने जो तरीका बताया तलाक़ का अगर उस तरीके से तलाक़ दे तो तलाक़ बहुत कम होगा। जैसे एक कंपनी चलाने अगर दो पार्टनर है और एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी चल रही है और अगर कुछ साल बाद दोनों पार्टनर में कुछ बातें नहीं मिली दोनों में समझदारी नहीं बन रही है तो बेहतर है दोनों कॉन्ट्रैक्ट ख़तम कर क अलग हो जाये वैसे ही शादी इस्लाम सामाजिक कॉन्ट्रैक्ट है लेकिन अगर बहुत कोसिस करने के बाद भी अगर दोनों में नहीं बन पाती है तो आखरी चीज़ है तलाक।  इस्ला...

हिजाब विवाद भारत (Hijab Controversy India )

हिजाब विवाद क्या सच में एक मुद्दा है या उसे मुद्दा बनाया गया ? क्या हिजाब से किसी को परेशानी होता है, किसी को परेशानी होनी चाहिए और किसे परेशानी हु ? हिजाब किसे कहा जाता है ? हिजाब एक तरह का कपड़ा होता है जो सर ढकने के लिए इस्तेमाल होता है।  असल में लोग  हिजाब , नक़ाब और बुरका में फर्क करहि नहीं प् रहे है। निचे फोटो में देखें हिजाब किसे कहते हैं। अब आप सोंच सकते हैं क्या हिजाब से किसी दूसरे को कोई परेशानी हो सकती हैं।  कहाँ से सुरु हुवा ये हिजाब विवाद ? कर्नाटक के एक कॉलेज में जब कुछ मुस्लिम छात्राएं  हिजाब पहन कर कॉलेज पहुंची तो उन्हें क्लास में जाने से रोका गया और उसे हिजाब निकाल कर क्लास में बैठने को कहा गया। ये छात्राएं मुस्लिम थीं अगर वहीँ कोई दूसरी धर्म की छात्रा सर पर दुपट्टा रख कर जाती तो उसे नहीं रोका जाता जैसा के कहीं नहीं रोका जाता हैं। क्यों के हिंदुस्तान में  बहुत सी लड़की की शादी 10th  के बाद कर दी जाती हैं और वो साडी में भी कॉलेज जाती हैं खुद मेरे क्लास में आया करती थीं।  हद तो तब हो गई जब भगवा गमछा लिए कुछ लड़के लड़कियां एक मुस्लिम लड़की को ...